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करवा चौथ व्रत रखने वाली सभी सुहागिनों को , सलाम खाकी न्यूज़ चैनल / एवं मासिक पत्रिका की ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं , जरूर पढ़ें क्यों मनाया जाता है करवा चौथ का पर्व

  हिन्दु पांचाग के मुताबिक करवा चौथ व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को पड़ता है।

                



 तिथि अनुसार ये तिथि इस साल आज 17 अक्टूबर दिन गुरूवार को बडी श्रद्धा के साथ पूरे भारत में  मनाया जा रहा है। इस व्रत को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अपने सुहाग की रक्षा के उद्देश्य से करती हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत कर कथा सुनकर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के अलावा कई कुंवारी लड़कियां भी रखती हैं। करवा चौथ मनाए जाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। जिसमें से एक श्री कृष्ण द्वारा द्रौपदी को बताए गए करवा चौथ व्रत कथा का महत्व भी है।


क्यों मनाया जाता है करवा चौथ 


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर त्योहार के पीछे कुछ न कुछ कहानी या कथा अवश्य होती है। इसी प्रकार करवा चौथ से संबंधित भी एक कहानी है। जिसके मुताबिक किसी जमाने में तुंगभद्रा नामक नदी के किनारे करवा नाम की एक प्रतिव्रता धोबिन रहती थी। कहते हैं कि उसका पति बहुत बूढ़ा और निर्बल था। वह एक दिन नदी के किनारे कपड़े धो रहा था उसी वक्त अचानक वहां मगरमच्छ आ गया। जिसके बाद मगरमच्छ उसके पैरों को दबाकर उसे ले जाने लगा। इसी क्रम में वह अपनी पत्नी का नाम लेकर चिल्लाया
               

पति की चिल्लाहट की आवाज सुनकर करवा वहां पहुंची , तब तक मगरमच्छ उसके पति को यमलोक पहुंचाने वाला था। जिसे देखकर करवा मगरमच्छ को कच्चे धागे से बांधकर यमलोक पहुंची और अपने पति की रक्षा की गुहार लगाई। इसके अलावा करवा ने यमराज से यह भी कहा कि उस मगरमच्छ को कठोर से कठोर दंड दें। इतना ही नहीं करवा ने यमराज से यह भी कहा- “अगर आप इस मगरमच्छ को दंड नहीं देते हैं तो मैं आपको शाप दे दूँगी 


🙏सलाम खाकी की ओर से देश की सभी 

सुहागनों को करवा चौथ व्रत की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ 🙏


और नष्ट कर दूंगी।” कहते हैं कि करवा के इस वचन को सुनकर यमराज भी डर गए और मगरमच्छ को नरक का रास्ता दिखा दिया और करवा के पति को लंबी आयु का वरदान दिया। मान्यता है कि जिस दिन यह घटना घटी वह दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि थी। तब से लेकर करवा चौथ मनाने की परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा पौराणिक कथाओं में और भी कई मान्यताएं करवा चौथ मनाने की हो सकती है ।
                 

    करवा चौथ व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने से लाभ:

             
करवा चौथ व्रत में चांदी के पात्र में पानी में थोड़ा सा दूध मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन में आ रहे समस्त नकारात्मक विचार, दुर्भावना, असुरक्षा की भावना और पति के स्वास्थ्य को लाभ मिलता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र की स्थिति भी मजबूत होती है।


सलाम खाकी न्यूज़ चैनल एवं मासिक पत्रिका के मुख्य सम्पादक जमीर आलम व समाचार संपादक सलेक चन्द वर्मा की रिपोर्ट

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